इलेक्ट्रॉनिक सिटी — बैलगाड़ी पर सवार सॉफ़्टवेयर

इलेक्ट्रॉनिक सिटी — बैलगाड़ी पर सवार सॉफ़्टवेयर
Multilingual AI audio guide exhibit on WOUDiO (PWA). WOUDiO pioneered the world’s first audio guide platform with built-in donation: listeners can support the cultural venue without leaving the listening experience. The text below is the localized description, details, and narration script for this audio guide stop.
सिल्क बोर्ड जंक्शन पर हॉर्न कभी पूरी तरह थमते नहीं। बसें, स्कूटर और कैब गर्मी में एक-दूसरे में फँसी रहती हैं, इंजन घरघराते रहते हैं, और उनके ऊपर खंभों पर टिकी एक कंक्रीट की सड़क दक्षिण की ओर भागती है। हर कामकाजी सुबह, दफ़्तर जाने वालों की एक नदी सड़कों की इस गाँठ से होकर अपनी मेज़ों की ओर ठुँसती हुई निकलती है। उन जामों को भरने वाला बहाव कुछ बक्सों से शुरू हुआ। 1985 में अमेरिकी चिप निर्माता टेक्सस इंस्ट्रूमेंट्स ने एक शोध केंद्र के लिए बेंगलुरु को चुना; भारत में ऐसा केंद्र खोलने वाली वह पहली बहुराष्ट्रीय कंपनी थी। दूसरे राज्यों ने मना कर दिया था; कर्नाटक सरकार ने हाँ कहा। टीम ने मिलर्स रोड पर सोना टावर्स में डेरा डाला, और उसे अमेरिका से सीधे डेटा लिंक की ज़रूरत थी, सो वे एक निजी सैटेलाइट डिश लाए, देश में अपनी तरह की पहली। क़िस्सा है कि उसे लाने वाले बक्से एक बैलगाड़ी पर आए, शहर की सड़कों पर धीरे-धीरे लुढ़कते हुए सॉफ़्टवेयर के दौर की ओर। दूसरे पहले से ही सफ़र में थे। इन्फ़ोसिस 1981 में पुणे में सात इंजीनियरों ने शुरू की थी, जिनमें एन. आर. नारायण मूर्ति और नंदन नीलेकणि भी थे। 1983 में वे इस नई-नवेली कंपनी को दक्षिण में बेंगलुरु ले आए। उसका मुख्यालय आज इलेक्ट्रॉनिक सिटी में है, शहर के दक्षिणी छोर पर, जिसे पहली बार 1978 में राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स निगम के आर. के. बालिगा ने बसाया था। फिर बूँदें बाढ़ बन गईं। भारत के हर राज्य से नौजवान ग्रेजुएट बैग भरते, रात की ट्रेन पकड़ते, और एक नौकरी के ऑफ़र और बहुत थोड़े सामान के साथ इस पठार पर उतर पड़ते! 1994 में सुदूर पूरब में व्हाइटफ़ील्ड में एक टेक पार्क उठा, जिसे सिंगापुर के एक कंसोर्टियम, टाटा समूह और राज्य सरकार ने मिलकर बनाया। लाल मिट्टी से काँच की मीनारें उठ खड़ी हुईं, कामकाज की एक पूरी दुनिया पठार पर आ बसी। बेंगलुरु देश का सबसे बड़ा सॉफ़्टवेयर निर्यातक बन गया, और उसकी आईटी कंपनियों में लगभग दस लाख लोग काम करने लगे। इतनी तेज़ी से बढ़ता शहर हर जोड़ पर चरमराता है। सड़कें साथ नहीं दे सकीं, और ट्रैफ़िक रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन गया। अक्टूबर 2011 में नम्मा मेट्रो का पहला हिस्सा खुला, बैयप्पनहल्ली से एमजी रोड तक एक छोटा-सा सफ़र। अब ट्रेनें ऊँची पटरियों पर गुनगुनाती चलती हैं, और 2025 में आख़िरकार एक लाइन इलेक्ट्रॉनिक सिटी तक पहुँची, उन्हीं सड़कों के ऊपर जहाँ से जाम शुरू होते हैं। नक़्शे पर हर नई लाइन एक पुराने रास्ते की नई लकीर है, हिंदुस्तान के किसी क़स्बे से इस पठार की किसी मेज़ तक का रास्ता। और हर शाम यही लोग अपनी भूख लिए गलियों से घर लौटते हैं, उन रसोइयों और कैंटीनों की ओर जो सौ साल से मुसाफ़िरों का इंतज़ार करती आ रही हैं। स्थान: इलेक्ट्रॉनिक सिटी (दक्षिण) और आईटीपीएल व्हाइटफ़ील्ड (पूरब) मुख्य तिथियाँ: इलेक्ट्रॉनिक सिटी की स्थापना 1978 (आर. के. बालिगा, KEONICS); टेक्सस इंस्ट्रूमेंट्स शोध एवं विकास केंद्र 1985; इन्फ़ोसिस 1983 में बेंगलुरु आई; आईटीपीएल व्हाइटफ़ील्ड 1994; नम्मा मेट्रो का पहला हिस्सा 20 अक्टूबर 2011 मुख्य तथ्य: टेक्सस इंस्ट्रूमेंट्स भारत में पहला बहुराष्ट्रीय शोध एवं विकास केंद्र था; यह शहर भारत का सबसे बड़ा आईटी निर्यातक है नक़्शा: बेंगलुरु का नक़्शा आधिकारिक साइट: Karnataka Tourism Photo: Zondor at English Wikipedia / Wikimedia Commons (CC-BY-SA-3.0)

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